06

Pahli mulakat dhara or Arnav ki ...

उसके घने, रेशमी बाल पूरे चेहरे पर बिखरे हुए थे, इसलिए उसका चेहरा बिल्कुल दिखाई नहीं दे रहा था।

के कदम अचानक वहीं ठिठक गए। उसकी बर्फ़-सी ठंडी नीली आँखें उस अनजान लड़की पर ठहर गईं।

कुछ पल...

पूरे मंदिर में ऐसा सन्नाटा छा गया मानो समय ने भी अपनी रफ्तार रोक दी हो।

वो खुद नहीं समझ पाया कि आखिर उसकी नज़र उस अनजान लड़की पर क्यों अटक गई थी।

उसने अनगिनत खूबसूरत चेहरों को देखा था... लेकिन आज, बिना चेहरा देखे ही, पहली बार किसी अजनबी की मौजूदगी ने उसका ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।

उसके भीतर कोई भावना नहीं जगी... फिर भी, वो अपनी नज़रें उससे हटा नहीं पा रहा था।

मानो किस्मत ने पहली बार उसकी ठंडी, बेजान दुनिया के दरवाज़े पर दस्तक दी हो...

और उसे अभी तक इसका एहसास भी नहीं था।

तभी अर्णव को पार्थ की आवाज सुनाई दी जो कह रहा था," भाई क्या हुआ । देख ये मंदिर है और हम इंडिया में है इसलिए अभी तो प्लीज अपने ....

पार्थ आगे कुछ कहता है उससे पहले ही अर्णव ने उसके तरफ देखा और कहा , मैं ऐसा कुछ नहीं सोचा , जो तू सोच रहा है मैं बस उस लड़की को देख रहा था ।

उसकी बात पर पार्थ ने तुरंत कहां , वही तो भाई तू उस लड़की को देख रहा था और तेरे दिमाग में लड़कियों को देखकर क्या-क्या ख्याल आते हैं मुझे अच्छे से पता है । भले ही तु उनके मर्जी के खिलाफ उन्हें नहीं छूटा लेकिन फिर भी ....और ....

वो अभी बोल ही रहा था कि अर्णव उसे अनसुना कर कर आगे निकल गया । उसे ऐसे जाते देखा पार्थ भी उसके पीछे-पीछे चला गया ।

कुछ देर में उनका काफिला शेखावत मेंशन की तरफ बढ़ गया ।

वही धारा अभी मां के चरणों में सोई हुई थी ।

वहीं दूसरी तरफ ,

शेखावत मेंशन में सभी जाग गए थे । और जब सभी डाइनिंग टेबल पर नाश्ता करने के लिए आए और जब उन्होंने देखा की धारा वहां नहीं है तो उन्हें थोड़ा अजीब लगा क्योंकि धारा सबसे पहले उठ जाती थी और उनसे पहले वहां मौजूद रहती थी ।

तभी गौरी आरोही की तरफ देखकर पूछता है , आरोही धारा कहां है अभी तक आई नहीं उसकी तबीयत तो ठीक है ना इतना लेट तक तो वो सोती नहीं है । बेटा एक बार जाकर देखो वैसे भी वो यहां जल्दी रुकती नहीं है वो तो कल तुम दोनों को मूवी देखते लेट हो गया था जिस वजह से वो रुकी थी ।

उसकी बात सुनकर आरोही गोरी से कहती है ," जी बड़ी मां मैं अभी देख कर आता हूं ।

इतना कहकर वो धारा के रूम की तरफ बढ़ जाती है ।

वही डाइनिंग टेबल पर शिव मास्टर चेयर पर बैठा था और उसके बगल में गौरी बैठी थी और उसके सामने तारा बैठी थी । और तारा के बगल में वायु बैठा था ।

जब से गोरी आई थी तब से गोरी ने ये रूल बना दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए सुबह का नाश्ता सभी को एक साथ करना था जिस कारण सभी एक साथ सुबह का नाश्ता करते थे क्योंकि कई बार उन लोगों को मीटिंग के चलते डिनर अपने क्लाइंट के साथ करना पड़ता था और काम के चलते सभी एक दूसरे से ज्यादा मिलते जुलते भी नहीं थे जो गौरी को अच्छा नहीं लगता था इसी करण गौरी ने ही रूल बनाया था और गौरी की बात को कोई टाल नहीं सकता था ।

तभी आरोही दौड़ते हुए नीचे आई और घबराई हुई आवाज में कहा ," बड़ी मां वो धारा घर में नहीं है मैंने उसका पूरा रूम चेक किया बाथरूम बालकोनी सब जगह पर वो रूम में नहीं थी । तो मुझे लगा वो मेरे रूम में होगी पर वो मेरे रूम में भी नहीं थी ।

आरोही की बात सुनकर सभी चौक गए और गौरी ने कहा , इतनी सुबह-सुबह कहां जा सकती है । अगर उसे अपने आश्रम जाना भी था तो वो हमें बात कर जाती है हमेशा ।

तभी वायु ने कहा , अरे उसे फोन करो ना । कोई इंपॉर्टेंट काम होगा जिस कारण चली गई होगी ।

वायु की बात सुनकर आरोही ने तुरंत कहा , मैंने कॉल किया था उसका मोबाइल रूम है ।

तभी तारा थोड़ा चिंता करते हुए कहती है , ऐसा तो कभी नहीं किया उसने ....

वो आगे कुछ कहती, उससे पहले ही बाहर कई गाड़ियों के एक साथ रुकने की आवाज़ पूरे शेखावत मेंशन में गूँज उठी।

घर के बाहर अचानक हुई हलचल सुनकर सभी की नज़रें मुख्य दरवाज़े की ओर उठ गईं।

उसी पल शिव के होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान उभर आई।

गौरी की नज़र जैसे ही उस मुस्कान पर पड़ी, उसने अपनी एक भौंह उठाई और हल्की मुस्कान के साथ बोली,

"क्या बात है, Mr. Shekhawat... आप इतने खुश क्यों नज़र आ रहे हैं? लगता है आपको पहले से पता है कि कौन आया है।"

शिव कुछ कह पाता, उससे पहले ही पूरे मेंशन में एक भारी, गहरी और अजीब-सी सिहरन पैदा कर देने वाली आवाज़ गूँज उठी—

"Mom...! Mom...! I am back!"

आवाज़ में अजीब-सी गर्माहट और अपनापन था...

लेकिन उसी अपनापन के पीछे ऐसी ठंडक छिपी थी कि सुनने वाले के रोंगटे खड़े हो जाएँ।

और अगले ही पल blue रंग के थ्री-पीस सूट में, लगभग छह फुट चार इंच लंबा एक आदमी पूरे रौब और शाही अंदाज़ के साथ अंदर दाखिल हुआ।

उसके पीछे पार्थ आ रहा था जिसके चेहरे पर बहुत ही प्यारी मुस्कान थी । उसे देखने से ही लग रहा था कि वो यहां आकर कितना ज्यादा खुश है ।

अर्णव की बर्फ़ जैसी ठंडी नीली आँखें पूरे हॉल पर एक नज़र दौड़ाकर सीधे गौरी पर आकर ठहर गईं।

अगले ही पल उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई।

"Missed me, Mom?"

अपने बेटे अर्णव को अपने सामने देखकर गोरी कुछ देर के लिए वहीं पर खड़ी रह गई । पर अगले ही पल वो दौड़कर अर्णव के पास गई और उसे गले लगा लिया ।

अर्णव ने भी अपनी मां को गले लगाया । अर्णव महसूस कर सकता था कि उसकी mom उसे कितना ज्यादा मिस कर रही थी ।

कुछ देर बाद गोरी उससे अलग हुई और उसके चेहरे को हाथ में भरकर उसके माथे पर किस की ,

वही अर्णव अपनी नीली आंखों से अपनी मां के नीली आंखों में देख रहा था जिसमें अभी आंसू भरे हुए थे । अर्णव ने बहुत ही प्यार से अपनी मां के गाल पर आए हुए आंसू को पौछा ।

तभी पीछे से पार्थ ने नाराजगी में कहा , अरे वाह आप तो मुझे भूल ही गई मैं भी तो आपसे दूर था ।

उसकी बात सुनकर गौरी पीछे देखी और उसके पास जाकर उसके गले भी लग गई और कहां ," ऐसा नहीं है मेरे बच्चे मुझे तुम्हारी भी बहुत याद आई ।

इतना कहकर उसने पार्थ के भी सर को चुम लिया ।

उसके पीछे-पीछे बाकी के घर वाले भी आए । और सभी अर्णव और पार्थ से मिलने लगे । तारा अर्णव के पास आई और उसके गले लगाते हुए कही , इतने सालों से मैं आपको मिस किया अब आपको हमारी याद आई ।

अर्णव ने तारा के सर का हाथ रखते हुए कहा ," ऐसा नहीं है स्टार मुझे तुम सब की याद आती थी पर ....

इतना कहकर वो शिव के तरफ देखने लगा जो वहीं पर कुछ दूरी पर खड़ा था । उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे । शायद वो कोल्डनेस जो अर्णव के पास थी वो शिव से ही आई थी दोनों को ही अपनी इमोशंस को दिखाना नहीं आता था । और ये बात घर के सभी लोग जानते थे वो दोनों भी ।

तभी साइट से वायु ने अर्णव को गले लगाया । और कहा भाई आपका एक और भाई है छोटा सा क्यूट सा प्यारा सा । अर्णव ने उसके तरफ देखा और मुस्कुरा कर से अच्छे से गले लगाया और कहा ," हां मुझे अच्छे से पता है । जो अब बहुत ही ज्यादा समझदार हो गया है ।

तभी उसकी नजर , आरोही पर गई अपना सर नीचे कर कर खड़ी थी उसकी आंखों में आंसू थे । अर्णव उसके पास गया और उसके सर पर हाथ रखते हुए कहा , जो कुछ भी हुआ उसमें तुम्हारी गलती नहीं थी और जो कुछ हो रहा है उसमें भी तुम्हारी गलती नहीं है तो अपनी जिंदगी खुल कर जिया करो मैंने जो किया वो सही था । ये बात तो तुम मानती हो ना । या फिर तुम भी मुझे....

वो आगे कहता है उससे पहले ही आरोही उसके गले लग गई और जोर-जोर से रोने लगी और कहां , आपने जो किया वो बिल्कुल सही था । मैं आपको कभी कसूरवार नहीं ठहरा सकती मैं भी एक लड़की हूं मैं समझ सकती हूं की बड़ी मां ...

तभी बाहर से एक बहुत प्यारी आवाज आई , यहां क्या हो रहा है ।

उस आवाज को सुनने के बाद सबको एहसास हुआ कि वो लोग धारा के लिए कुछ परेशान थे ।

सबकी नज़रें उधर आवाज के direction में चली गई ।

अर्णव की नज़र जैसे ही धारा पर पड़ी, उसकी साँसें एक पल के लिए थम-सी गईं।

वो कुछ time तक बिना पलक झपकाए बस उसे देखता रह गया।

बेबी पिंक रंग के लॉन्ग फ्रॉक सूट में धारा की खूबसूरती जैसे और भी निखर आई थी। उसके लंबे, रेशमी बाल हवा के हल्के झोंकों के साथ धीरे-धीरे लहरा रहे थे। अभी-अभी हल्की धूप से आई थी जिस वजह से उसका चेहरा एक अलग ही ताज़गी से दमक रहा था।

उसके गुलाबी गाल, मासूम-सी बड़ी आँखें और हल्के पिंक होंठ... सब मिलकर उसे इतना नाज़ुक बना रहे थे कि ऐसा लग रहा था मानो किसी कलाकार ने बड़े प्यार से एक जीती जागती गुड़िया को आकार दिया हो। उसकी त्वचा इतनी कोमल और गुलाबी दिखाई दे रही थी कि पहली नज़र में किसी को भी स्ट्रॉबेरी क्रीम की याद आ जाए।

अर्णव अनजाने में मुस्कुरा उठा।

उसके मन में बस एक ही ख़याल आया— पिंक डॉल्फिन ।

फिर उसे याद आया कि धारा ने वैसे ही कपड़े पहने हैं जैसे उसने उस मंदिर में उस लड़की को पहने हुए देखा था , की तभी ...

वायु धारा के पास आया और उसके हाथ को पकड़ कर बहुत ही प्यार से पूछा , धारा तुम कहां चली गई थी हम लोग कितना परेशान हो गए थे ।

धारा हल्का मुस्कुरा कर वायु से कहती है , कहीं नहीं बस काली मां के मंदिर गई थी ।

ये सुनते ही अर्णव को कंफर्म हो जाता है कि ये वही लड़की है । और उसके मुंह से धीरे से निकलता है पिंक डॉल्फिन ।

तभी धारा की नजर अर्णव की आंखों पर जाती है । जिसे देखकर वो एक बार और डर जाती है । वही अर्णव अपने नीले आंखों से उसे ही देख रहा था ।

वही धारा को ऐसे अर्णव से डरता देखकर गौरी उसके पास आती है और कहती है ," तुम इतना डर क्यों रही हो यह मेरा सबसे बड़ा बेटा है अर्णव इसके बारे में मैं कल बताया था और तुम्हें फोटो दिखाई थी ।

तभी उसे याद आता है कि गौरी ने कल उसे अर्णव की फोटो दिखाई थी । और वो अर्णव के फोटो में उसके आंखों में बहुत देर तक देखते रह गई थी । और फिर रात में उसने थ्रिलर वाली मूवी देखी थी । शायद इसी वजह से उसे वो सपना आया था यही सोच कर वो खुद को शांत करती है ।

वही वो एक बार और अर्णव को देखते हैं तो पाती है कि अर्णव अभी भी उसे ही देख रहा था । ये देखकर वो अपने नजरे झुका लेती है उसे बहुत अजीब लग रहा था ।

तभी गौरी अर्णव की तरफ देखकर कह कर कहती है ," अर्णव ये धारा है आरोही की बेस्ट फ्रेंड कभी-कभी यही रुक जाती है ।

अर्णव कुछ नहीं कहता बस अपनी गर्दन हां मैं हिला देता है ।

और फिर बिना गौरी के तरफ देखकर कहता है , Mom मुझे फ्रेश होकर आराम करना है ।

इतना कहकर वो एक नजर धारा को देखा है और फिर अपने रूम में चला जाता है ।

Ok thank you,

Acha dekho mai manti hu mane bhut hi normal dhara or Arnav ko sath lai hu per , mai bhut kuch sochi hu , bass thora sa biswas rakhiye aap sab paka maja aayega aapko aage ....

Bhut romantic hai aage ki story matlb kuch or chapter ke baad , or bhut suspense thriller bhi hai ....

8277237

Radha Radha 🙏🙏🙏🙏🙏

Write a comment ...

Write a comment ...