
अर्णव के जाते ही पूरे हॉल में कुछ पल के लिए अजीब-सी खामोशी छा गई।
धारा ने धीरे से राहत की साँस ली। पता नहीं क्यों... उस आदमी की नीली, बर्फ़ जैसी ठंडी आँखों ने उसके दिल में एक अनजाना डर बैठा दिया था।
उधर सीढ़ियाँ चढ़ते हुए अर्णव के कदम अचानक रुक गए।
उसके दिमाग में बार-बार मंदिर का वही दृश्य घूम रहा था।
बंद आँखों से माँ काली के चरणों में सोई हुई वह लड़की...
और अब...
वही लड़की उसके घर में... उसकी माँ के सामने खड़ी थी।
उसने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं।
"Interesting..."
उसके होंठों पर हल्की-सी मुस्कान आई और वह अपने कमरे की ओर बढ़ गया।
...
नीचे हॉल में...
गौरी ने धारा के सिर पर प्यार से हाथ फेरा।
"बेटा, तुम बिना बताए चली गई थीं। हम सब बहुत घबरा गए थे।"
धारा ने शर्मिंदा होकर सिर झुका लिया।
"सॉरी बड़ी माँ... सुबह आँख जल्दी खुल गई थी। पता नहीं क्यों मन हुआ कि माँ काली के दर्शन कर लूँ। सोचा जल्दी वापस आ जाऊँगी... लेकिन मंदिर में बैठते-बैठते कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला।"
उसकी बात सुनकर सबने राहत की साँस ली।
वायु ने नाटकीय अंदाज़ में अपना सीना पकड़ लिया।
"मतलब... हमारी जान ही निकल गई थी और मैडम मंदिर में आराम से सो रही थीं!"
सब हल्का-सा हँस पड़े।
धारा ने कान पकड़ते हुए कहा,
"सॉरी... आगे से ऐसा नहीं होगा।"
तारा ने उसके गाल खींचते हुए कहा,
"बस इस बार माफ़ किया।"
सभी का माहौल फिर से सामान्य हो गया।
लेकिन...
Tara की नज़र बार-बार ऊपर अर्णव के कमरे की ओर जा रही थी।
उसे अच्छी तरह पता था...
जब भी अर्णव किसी बात को लेकर चुप हो जाता है...
तब उसके दिमाग में कुछ न कुछ ज़रूर चल रहा होता है।
...
दूसरी तरफ...
अर्णव अपने कमरे में पहुँच चुका था।
कमरा बिल्कुल वैसा ही था जैसा वह छोड़कर गया था।
हर चीज़ अपनी जगह पर...
एकदम व्यवस्थित...
उसने अपना कोट उतारकर सोफ़े पर फेंका और अपने रूम का दरवाजा बंद किया ।
अर्णव के कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही उसकी आँखों में फिर वही मंदिर वाला दृश्य घूम गया।
वो लड़की...
जिसका चेहरा उसने पहली बार बालों के पीछे छिपा हुआ देखा था...
और अब...
वही लड़की उसके घर में थी।
उसने धीरे से अपनी टाई ढीली की और खिड़की के सामने जाकर खड़ा हो गया।
नीचे गार्डन में धारा वायु और तारा के साथ हँस रही थी।
उसकी हँसी...
अर्णव को अजीब तरह से बेचैन कर रही थी।
उसने खुद से कहा,
"Why her...?"
उसके जीवन में सैकड़ों खूबसूरत लड़कियाँ आई थीं।
किसी को उसने दोबारा मुड़कर नहीं देखा।
लेकिन इस लड़की से नज़र हटाना उसके लिए मुश्किल हो रहा था।
उसे यह एहसास बिल्कुल पसंद नहीं आया।
अचानक उसका फोन बजा।
स्क्रीन पर नाम चमका—
Victor.
"Yes."
"Boss... Italy वाली डील पूरी हो गई है।"
"Good."
"लेकिन एक और खबर है... आपके दुश्मन भारत में दिखाई दिए हैं।"
अर्णव की नीली आँखें और ठंडी हो गईं।
"Keep watching them."
"Yes Boss."
कॉल कट गई।
अर्णव के चेहरे पर फिर वही निर्दयी भाव लौट आए।
लेकिन अगले ही पल...
नीचे से धारा की खिलखिलाहट सुनाई दी।
अनजाने में उसकी नज़र फिर उसी पर चली गई।
उसने खुद पर झुंझलाते हुए परदे बंद कर दिए।
"Enough..."
...
उधर नीचे...
धारा ने महसूस किया कि कोई उसे देख रहा था।
उसने ऊपर देखा।
लेकिन इस बार बालकनी खाली थी।
"क्या हुआ?"
आरोही ने पूछा।
धारा हल्का-सा मुस्कुराई।
"कुछ नहीं... मुझे लगा कोई मुझे देख रहा था।"
"शायद वहम होगा।"
धारा ने भी यही सोचकर बात वहीं खत्म कर दी।
लेकिन उसे क्या पता...
पूरे गार्डन के हर कोने में अर्णव के सिक्योरिटी कैमरे लगे हुए थे।
अपने कमरे में पहुँचते ही अर्णव ने लैपटॉप खोला।
एक-एक कैमरे की लाइव फीड उसके सामने आ गई।
उसकी उँगलियाँ अपने आप उस कैमरे पर जाकर रुक गईं...
जहाँ धारा दिखाई दे रही थी।
वह बिना किसी भाव के स्क्रीन को देखता रहा।
कुछ सेकंड...
फिर एक मिनट...
फिर पाँच मिनट...
उसे खुद एहसास नहीं हुआ कि वह कब से सिर्फ़ उसी को देख रहा था।
तभी दरवाज़ा बिना नॉक किए खुला।
पार्थ अंदर आया।
उसकी नज़र सीधे लैपटॉप पर गई।
स्क्रीन पर धारा थी।
पार्थ ने मुस्कुराकर कहा,
"भाई... तू किसी लड़की को CCTV में देख रहा है?"
अर्णव ने तुरंत स्क्रीन बंद कर दी।
"Get out."
"ओहो... मामला तो सीरियस है।"
"Parth..."
इस बार अर्णव की आवाज़ इतनी ठंडी थी कि कोई और होता तो डर जाता।
लेकिन पार्थ हँस पड़ा।
"ठीक है... जा रहा हूँ। लेकिन एक बात बता दूँ..."
वह दरवाज़े पर रुककर बोला,
"जिस दिन तू किसी लड़की को बार-बार देखने लगे... समझ लेना कि वह तेरी कमजोरी बनने लगी है।"
दरवाज़ा बंद हो गया।
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
अर्णव ने धीरे से अपनी आँखें बंद कीं।
"She... can never be my weakness."
लेकिन उसे नहीं पता था...
किस्मत पहले ही फैसला कर चुकी थी।
जिस लड़की को वह अपनी कमजोरी बनने से रोकना चाहता था...
वही एक दिन उसकी सबसे बड़ी ऑब्सेशन बनने वाली थी।
अर्णव ने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं।
उसकी नज़र एक बार फिर बंद पड़े लैपटॉप पर गई।
कुछ पल पहले तक स्क्रीन पर सिर्फ़ धारा थी...
और अब...
उसके दिमाग में भी सिर्फ़ वही थी।
उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था।
उसने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी किसी इंसान को इतनी देर तक नहीं देखा था। उसके लिए हर चेहरा बस एक चेहरा था। कोई मायने नहीं रखता था। लेकिन धारा...
उसके साथ कुछ अलग हो रहा था।
"Ridiculous..."
उसने बुदबुदाते हुए लैपटॉप बंद किया और वॉशरूम की तरफ बढ़ गया।
ठंडे पानी की धार सीधे उसके चेहरे पर पड़ी।
उसने शीशे में खुद को देखा।
बर्फ जैसी नीली आँखें...
भावहीन चेहरा...
वही इंसान जिससे पूरी अंडरवर्ल्ड काँपती थी।
लेकिन आज...
एक मासूम लड़की उसके सारे विचारों को अस्त-व्यस्त कर रही थी।
उसने ज़ोर से मुट्ठी दीवार पर मारी।
"Control yourself."
...
उधर नीचे...
धारा अब गौरी के साथ किचन में थी।
"बेटा, तुम बैठो। मैं नाश्ता लगा देती हूँ।"
"नहीं बड़ी माँ, आज मैं बनाऊँगी।"
गौरी मुस्कुरा दी।
"आज मेरा बेटा इतने साल बाद घर आया है। उसके लिए अपने हाथ से खाना बनाऊँगी।"
धारा भी मुस्कुरा दी।
"तो फिर मैं आपकी हेल्प कर देती हूँ।"
दोनों साथ मिलकर नाश्ता बनाने लगीं।
उधर तारा और आरोही सब्जियाँ काट रही थीं।
वायु हमेशा की तरह चोरी-छिपे पकौड़े उठाने की कोशिश कर रहा था।
धारा ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया।
"वायु..."
वायु मासूम चेहरा बनाकर बोला,
"मैं तो बस चेक कर रहा था कि नमक ठीक है या नहीं।"
तारा हँस पड़ी।
"तुम्हारा पेट कभी नहीं भरता।"
"खाली पेट इंसान सोच नहीं सकता।"
सब ज़ोर से हँस पड़े।
पूरा किचन हँसी से भर गया।
...
उसी समय ऊपर बालकनी में...
अर्णव खड़ा सब देख रहा था।
उसकी नज़र सबसे ज़्यादा धारा पर थी।
वह बिना किसी बनावट के हँस रही थी।
उसकी मुस्कान...
इतनी सच्ची थी कि कुछ पल के लिए अर्णव अपनी दुनिया भूल गया।
अचानक पीछे से शिव की आवाज़ आई।
"क्या देख रहे हो?"
अर्णव ने बिना पीछे मुड़े कहा,
"कुछ नहीं।"
शिव उसके पास आकर खड़ा हो गया।
उसने नीचे देखा।
सब हँस रहे थे।
फिर उसने बेटे की तरफ देखा।
"तुम झूठ बोलना अभी भी नहीं सीख पाए।"
अर्णव चुप रहा।
शिव हल्का-सा मुस्कुराया।
"जिसे देख रहे हो... वह इस घर की मेहमान है।"
अर्णव की नज़रें नहीं बदलीं।
"मैं किसी को नहीं देख रहा।"
"ठीक है।"
शिव इतना कहकर चला गया।
लेकिन जाते-जाते उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी।
शायद उसने अपने बेटे की आँखों में पहली बार कोई बदलाव देखा था।
...
करीब आधे घंटे बाद...
सब लोग फिर डाइनिंग टेबल पर बैठे थे।
धारा सबसे आखिर में आई।
जैसे ही वह बैठने लगी...
उसी समय सीढ़ियों से अर्णव नीचे उतरा।
नीले रंग की शर्ट...
काली पैंट...
गीले बाल...
और हमेशा की तरह भावहीन चेहरा।
उसके आते ही पूरा माहौल कुछ पल के लिए शांत हो गया।
अर्णव बिना किसी की तरफ देखे अपनी कुर्सी पर बैठ गया।
गौरी ने तुरंत उसकी प्लेट में खाना परोसा।
"इतने साल बाद मेरे हाथ का खाना खाओगे।"
अर्णव ने पहली बार हल्का-सा मुस्कुराकर कहा,
"I missed this."
गौरी की आँखें भर आईं।
धारा यह सब चुपचाप देख रही थी।
उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि यही इंसान कुछ देर पहले उसे इतना डरावना लग रहा था।
अपनी माँ के सामने उसका व्यवहार बिल्कुल अलग था।
लेकिन...
जैसे ही अर्णव ने सिर उठाया...
उसकी नज़र सीधे धारा पर आकर रुक गई।
धारा फिर घबरा गई।
उसने तुरंत अपनी नज़रें झुका लीं।
वह समझ नहीं पा रही थी कि आखिर यह आदमी उसे बार-बार क्यों देख रहा है।
उधर...
अर्णव भी खुद से परेशान था।
वह चाहकर भी अपनी नज़रें दूसरी तरफ नहीं कर पा रहा था।
तभी पार्थ ने दोनों को देख लिया।
उसने धीरे से वायु के कान में कहा,
"देखना... आज भाई कुछ न कुछ ज़रूर करेगा।"
वायु ने हैरानी से पूछा,
"क्या?"
"बस देख।"
उसी समय गौरी ने धारा से कहा,
"बेटा, ज़रा अर्णव को जूस देना।"
धारा का दिल धड़क उठा।
उसने काँपते हाथों से जूस का गिलास उठाया और अर्णव की तरफ बढ़ी।
जैसे ही उसने गिलास आगे किया...
उसी समय उसका हाथ हल्का-सा काँप गया।
गिलास फिसलने ही वाला था कि...
अर्णव ने बिजली जैसी तेजी से उसका हाथ पकड़ लिया।
एक हाथ से उसने गिलास संभाल लिया...
और दूसरे हाथ से धारा की कलाई।
पूरा डाइनिंग हॉल एकदम शांत हो गया।
धारा की साँसें तेज़ हो गईं।
उसने पहली बार अर्णव को इतने करीब से देखा।
उसकी नीली आँखें...
इतनी गहरी थीं कि उनमें देखते ही धारा जैसे कहीं खोने लगी।
लेकिन अगले ही पल उसे डर का एहसास हुआ।
उसने जल्दी से अपना हाथ छुड़ा लिया।
"स... सॉरी।"
अर्णव कुछ सेकंड तक उसी की तरफ देखता रहा।
फिर बिना कुछ कहे जूस का गिलास उठा लिया।
लेकिन उसके हाथों में अभी भी धारा की कलाई की नरमी का एहसास बाकी था।
और यही एहसास उसे भीतर तक बेचैन कर गया...
उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि यह सिर्फ़ शुरुआत थी।
Yaar dekho mai ye story plot ki hu ....
Thora to wiswah karo Yaar or reviews aacha diya kro , plzz...
Or ye Obsession or possessive sab hoga arnav dhara ke liye per aabhi nahi , kuch chaper baad pahale , bhut kuch hoga ...
Ha romance hoga dono mai per pyar nahi ...
Pyar kuch chapter baad hoga ....
8277237
Radha Radha 🙏🙏🙏🙏🙏
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