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Dhruv tara

तभी ना जाने आज मैं उसको क्या हुआ वो झुका और धारा के होठों पर अपने होठ रख दिया । और उसे सॉफ्टली किस करने लगा ।

और वही धारा की पकर अपने टेडी बेयर पर कस गई ।

किडनैपिंग और  डॉक्टर की दी गई दवाई के कारण धारा बहुत ही ज्यादा गहरी नींद में सोई हुई थी  ।

वही अर्णव बहुत ही प्यार से उसके होठों को आराम से किस किया जा रहा था । उस किस में केवल और केवल उसका प्यार छिपा हुआ था जिसका अंदाजा शायद होश में आने पर उसको भी नहीं होने वाला था ।

वही अर्णव को ऐसा सुकून मिल रहा था, जैसा उसे अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी नहीं मिला था।

यही वो एहसास था...

जिसकी तलाश में वो पूरी दुनिया से लड़ता रहा था।

जिस सुकून को पाने के लिए उसने न जाने कितने तूफ़ानों का सामना किया, कितनी रातें जागकर गुज़ारीं और कितनी बार अपने ही जज़्बातों को दफ़न कर दिया।

लेकिन आज...

वो  सुकून किसी दौलत, ताक़त या जीत में नहीं था।

वो इस कमरे की खामोशी में था...

धारा की मासूम नींद में था...

और उसकी बेख़बर मुस्कान में था। और उसके पहले किस का था जो किसी लास्ट का या जरूरत का नहीं प्यार का था ।

कुछ देर बाद अर्णव  अलग हुआ और धारा को देखते हुए

अर्णव के होंठों पर बहुत हल्की-सी मुस्कान आई।

उसने मन ही मन कहा—

"अगर सुकून का कोई चेहरा होता... तो शायद वो तुम्हारा होता, पिंक डॉल्फिन।"

तभी अर्णव की नज़र धारा की बाँहों में दबे टेडी बेयर पर पड़ी।

धारा उसे इस तरह सीने से लगाए सो रही थी, मानो बचपन की कोई प्यारी-सी आदत अब तक उसके साथ हो।

अर्णव कुछ पल उसे देखता रहा।

फिर न जाने उसके मन में क्या आया।

उसने बेहद सावधानी से टेडी बेयर को धारा की बाँहों से अलग किया, इस तरह कि उसकी नींद ज़रा भी न टूटे।

अगले ही पल वो उसी जगह, बिस्तर के किनारे, चुपचाप लेट गया।

जैसे ही वो लेटा, गहरी नींद में डूबी धारा ने अनजाने में करवट बदली।

बिना आँखें खोले उसने  अपना एक हाथ अर्णव के सीने पर रख दिया और दूसरे हाथ से उसकी शर्ट को हल्के से थाम लिया, बिल्कुल वैसे ही जैसे कुछ time पहले वो अपने टेडी बेयर को थामे हुए थी।

उसके चेहरे पर एक सुकूनभरी मुस्कान उभर आई।

अर्णव एक पल के लिए बिल्कुल स्थिर हो गया।

उसने धारा की ओर देखा। वो अब भी गहरी नींद में थी, अपने आसपास हो रही किसी भी बात से पूरी तरह बेख़बर।

अर्णव के होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान आ गई।

कमरे में फिर वही गहरा सन्नाटा छा गया।

बस धारा की धीमी साँसों की लय और अर्णव के चेहरे पर बरसों बाद उतरा वो सुकून । धीरे-धीरे ना जाने अर्णव भी गहरी नींद में कब सो गया ।

इस बात से अनजान कि कल सुबह का सूरज उन दोनों के लिए एक ऐसी सुबह लाने  वाली है जिससे हम दोनों की जिंदगी पूरी तरह से बदल जाएगी ।

सुबह का वक्त

सभी लोग हमेशा की तरह डाइनिंग टेबल पर मौजूद थे। सुबह की हल्की धूप पूरे हॉल में फैल रही थी। नौकर-चाकर नाश्ता परोसने में व्यस्त थे और परिवार के सभी सदस्य अपनी-अपनी जगह पर बैठे थे।

बस दो लोग वहाँ नहीं थे...

अर्णव और धारा।

आरोही ने चारों ओर नज़र दौड़ाई। जब दोनों कहीं दिखाई नहीं दिए तो उसने गौरी की तरफ देखकर कहा,

"बड़ी माँ... धारा अभी तक सो रही है? मैं जाकर उसे उठा लाती हूँ।"

गौरी ने हल्की मुस्कान के साथ सिर हिलाया।

"नहीं बेटा... उसे आराम करने दो। डॉक्टर ने कहा था कि उसे नींद का इंजेक्शन दिया गया है। दवाई का असर अभी तक होगा, इसलिए शायद वह अभी सो रही है। उसे परेशान मत करो।"

आरोही ने भी हा में सिर हिला दिया।

तभी शिव की भारी और ठंडी आवाज़ पूरे डाइनिंग हॉल में गूँज उठी।

"धारा की बात समझ में आती है... लेकिन अर्णव कहाँ है?"

उन्होंने घड़ी की तरफ एक नज़र डाली और फिर सभी की ओर देखते हुए कहा,

"वो तो बिल्कुल ठीक था। अभी तक नीचे क्यों नहीं आया? क्या घर के रूल्स भूल चुका है?"

शिव की ठंडी आवाज़ सुनते ही पार्थ के चेहरे का रंग उड़ गया।

उसके हाथ में पकड़ा जूस का गिलास हल्का-सा काँप गया।

उसके दिमाग में एक ही बात घूमने लगी—

'गया काम से...!'

उसे तो यही पता था कि अर्णव रात को घर लौटा ही नहीं।

उसे लग रहा था कि अर्णव अभी भी होटल के उसी कमरे में है...

उस  लड़की के साथ।

अगर अभी सबको ये पता चल गया कि अर्णव पूरी रात घर से बाहर था...

तो सबसे पहले सवाल उसी से पूछे जाएँगे।

पार्थ के माथे पर पसीने की बूँदें उभर आईं।

उसने घबराकर एक पल के लिए आँखें बंद कीं और अगले ही पल जल्दबाज़ी में बोल पड़ा,

"वो... अर्णव सुबह-सुबह ही एक मीटिंग के लिए निकल गया।"

उसकी आवाज़ इतनी तेज़ निकली कि डाइनिंग टेबल पर बैठे सभी लोग एक साथ उसकी तरफ देखने लगे।

पार्थ को तुरंत अपनी गलती का एहसास हुआ।

उसने बनावटी हँसी हँसते हुए माहौल सही करने की कोशिश की।

"म... मेरा मतलब... अर्णव की एक फॉरेनर क्लाइंट के साथ ज़रूरी मीटिंग थी। इसलिए वो सुबह जल्दी निकल गया। उसने मुझे बताया था... बस मैं आप लोगों को बताना भूल गया।"

कुछ पल के लिए पूरे हॉल में खामोशी छा गई।

शिव की गहरी नज़रें सीधे पार्थ के चेहरे पर टिकी थीं।

जैसे वो उसकी आँखों के पीछे छिपा सच पढ़ने की कोशिश कर रहे हों।

पार्थ ने नज़रें चुराकर जल्दी से पानी का गिलास उठा लिया।

उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि उसे खुद उसकी धड़कनें सुनाई दे रही थीं।

वो मन ही मन बस एक ही प्रार्थना कर रहा था—

"हे भगवान... ये दोनों बाप बेटे Devil है एक devil से बचो तो दूसरा devil आ जाते हैं । प्लीज़ बचा लो ।"

तभी तारा ने मुस्कुराते हुए माहौल बदलने की कोशिश की।

"अच्छा, वो सब छोड़िए। आप लोगों को याद है ना कि आज से मुझे ओबेरॉय इंटरप्राइजेज में जॉइन करना है? डैड... आपको याद है ना, आपने मुझे वहाँ काम करने की परमिशन दे दी है।"

उसकी बात सुनते ही शिव की नज़रें अपनी बेटी पर टिक गईं।

उनके सख्त चेहरे पर भी एक हल्की-सी मुस्कान उभर आई।

उन्होंने बेहद प्यार  भरे स्वर में कहा,

"हाँ, मुझे सब याद है। और मैंने तुम्हें परमिशन भी दी है।"

फिर उनकी आवाज़ थोड़ी गंभीर हो गई।

"लेकिन एक बात हमेशा याद रखना, तारा..."

"चाहे तुम जहाँ भी रहो... मेरी नज़र हमेशा तुम पर रहेगी। इसलिए .....

वो आगे कुछ कहता उससे पहले ही तारा ने कहा...

"डोंट वरी, डैड। मैं आपको शिकायत का एक भी मौका नहीं दूँगी।"

उसकी बात सुनकर शिव ने हा से सिर हिलाया,

लेकिन...

उसके चेहरे पर दिख रही मासूम मुस्कान के पीछे उसके दिमाग में कुछ और ही चल रहा था।

"आख़िरकार... अब रोज़ उनसे मिलने का मौका मिलेगा।"

ये ख़याल आते ही उसके होंठों की मुस्कान और भी गहरी हो गई।

उधर, तारा के ठीक बगल में बैठा वायु उसकी वही  मुस्कान देख रहा था।

उसने धीरे से मुँह बनाया और मन ही मन बड़बड़ाया,

"हाँ-हाँ... खुश तो होगी ही। आखिर जिसके पास जाने की इतनी जल्दी है। भगवान ही बचाए अब उसका!"

उसने एक गहरी साँस ली।

"एक तरफ डैड... पूरे के पूरे डेविल। दूसरी तरफ मेरा बड़ा भाई... उससे भी दो कदम आगे। और अब तीसरी मेरी बहन... ये भी किसी तूफ़ान से कम नहीं निकली।"

उसने मन ही मन अपना सिर पकड़ लिया।

"इस पूरे खानदान में अगर कोई सीधा-सादा और शरीफ है... तो बस मैं हूँ। और दूसरी मेरी माँ। पता नहीं हम दोनों इस शैतानों के परिवार में आए कैसे!"

अभी वायु अपने ही ख़यालों में डूबा हुआ था कि अचानक शिव की गंभीर आवाज़ उसके कानों में पड़ी।

बिना उसकी तरफ देखे, आराम से नाश्ता करते हुए शिव बोले,

"तुम्हें... और तुम्हारी माँ को इस परिवार में लाने वाला भी मैं ही था।"

एक पल के लिए...

वायु के हाथ में पकड़ा चम्मच हवा में ही रुक गया।

उसकी आँखें आश्चर्य से फैल गईं।

"हे भगवान... क्या डैड ने मेरी मन की बातें फिर से सुन ली मैं क्यों भूल जाता हूं कि वो मेरी हर बात सुन लेते हैं?"

ये सोचते ही उसने घबराकर तुरंत अपनी नज़रें नीचे कर लीं और चुपचाप नाश्ता करने लगा।

उसे देखकर डाइनिंग टेबल पर बैठे बाकी लोगों के चेहरे पर कन्फ्यूजन साफ दिखाई दे रहा था बेचारे को तो पता ही नहीं था कि वायु अपने ख्यालों में क्या-क्या सोच रहा था ।

कुछ देर बाद ,

Tara ओबेरॉय इंडस्ट्री जा चुकी थी और शिव और वायु शेखावत इंटरप्राइजेज जा चुके थे । पार्थ अपने रूम में चला गया था उसे ऑस्ट्रेलिया के कुछ काम करने थे जो वह ऑनलाइन करने वाला था शायद वो इल्लीगल काम था जो की ओसियन करता है और ओसियन का लेफ्ट हैंड होने के नाते कुछ काम पार्थ कर देता था ।

वहीं दूसरी तरफ ,

सुबह की सुनहरी धूप Oberoi Enterprises की विशाल ग्लास बिल्डिंग पर पड़कर उसे और भी शानदार बना रही थी।

उसी समय एक Black Rolls-Royce Phantom पूरे रॉयल अंदाज़ में कंपनी के Main Entrance के सामने आकर रुकी।

ड्राइवर तुरंत बाहर निकला और आदर के साथ पीछे का दरवाज़ा खोल दिया।

अगले ही पल...

एक लंबी, खूबसूरत टाँग ज़मीन पर पड़ी।

फिर पूरे आत्मविश्वास और रॉयल एटीट्यूड के साथ तारा गाड़ी से नीचे उतरी।

आज उसने Royal Blue Bodycon Dress पहनी हुई थी, जो घुटनों से थोड़ा ऊपर तक थी। ड्रेस का डिज़ाइन बेहद Elegant और Classy था, जो उसकी स्लिम फिगर को और भी ग्रेसफुल बना रहा था।

उसके लंबे, सिल्की ब्लैक बाल पूरी तरह खुले थे, जो ठंडी हवा के झोंकों के साथ हल्के-हल्के लहरा रहे थे।

चेहरे पर Nude Makeup, हल्का-सा Glossy Pink Lipstick, बड़ी-बड़ी काली आँखें और होंठों पर आत्मविश्वास से भरी एक हल्की मुस्कान...

उसे किसी Luxury Fashion Magazine के कवर मॉडल जैसा लुक दे रहे थे।

उसकी कलाई पर चमकती Diamond Watch, कानों में छोटे-से Diamond Stud Earrings और पैरों में Black High Heels उसकी रॉयल पर्सनैलिटी को और भी निखार रहे थे।

जैसे ही उसने अपने Sunglasses उतारे, उसकी तेज़ और आत्मविश्वास से भरी नज़रें सीधे कंपनी की ऊँची बिल्डिंग पर जाकर ठहर गईं।

उसके होंठों पर एक हल्की-सी मुस्कान उभरी।

"Let's see... Oberoi Enterprises."

इतना कहकर उसने पूरे कॉन्फिडेंस के साथ अंदर की ओर कदम बढ़ाए।

Tap... Tap... Tap...

उसकी हाई हील्स की आवाज़ पूरे Reception Lobby में गूँजने लगी।

वहाँ मौजूद कई Employees, Staff Members और Visitors अनायास ही उसकी तरफ देखने लगे।

कुछ उसकी खूबसूरती से प्रभावित थे...

तो कुछ उसके रॉयल ऑरा और कॉन्फिडेंस को देखकर हैरान।

तभी...

तारा की नज़र अचानक Reception Lobby के एक कोने में जाकर ठहर गई।

उसके कदम वहीं रुक गए।

कुछ पल के लिए जैसे उसके आसपास की सारी आवाज़ें धीमी पड़ गईं।

उसकी नज़रें सिर्फ़ एक ही इंसान पर टिकी थीं...

वो...

जिससे मिलने के लिए वो आज इतनी खुश थी।

उसे देखते ही उसके चेहरे पर एक बेहद खूबसूरत मुस्कान खिल उठी।

उसकी आँखों में खुशी साफ़ झलक रही थी।

लेकिन...

वहो खुशी ज़्यादा देर टिक नहीं सकी।

क्योंकि अगले ही पल उसकी नज़र उस लड़के के सामने खड़ी एक लड़की पर पड़ी।

वो लड़की उससे हँस-हँसकर बातें कर रही थी...

और सबसे बड़ी बात...

वो भी मुस्कुराकर उसका जवाब दे रहा था।

बस...

यही एक पल तारा के चेहरे का रंग बदलने के लिए काफ़ी था।

उसके होंठों की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।

आँखों में उतर आई नरमी अब बर्फ़ जैसी ठंडक में बदल चुकी थी।

उसकी उँगलियाँ धीरे-धीरे मुट्ठियों में बदल गईं।

उसने एक गहरी साँस ली...

और अपनी तीखी नज़रें उस लड़की पर जमा दीं।

बेचारी लड़की...

उसे तो शायद ये भी नहीं पता था कि वह इस वक्त किसकी नज़रों में आ चुकी है।

कुछ सेकंड तक तारा बिना पलक झपकाए उसे देखती रही।

फिर...

अचानक उसके होंठों पर एक बेहद हल्की,  मुस्कान तैर गई।

वो मुस्कान...

जो उसे अच्छी तरह जानता हो, उसके लिए किसी Warning Bell से कम नहीं थी।

उसने धीमे से अपने आप से कहा,

"Interesting..."

"मेरे सामने... मेरे ही ध्रुव के साथ इतनी हँसकर बातें?"

उसने हल्का-सा सिर टेढ़ा किया और उस लड़की को ऊपर से नीचे तक देखा।

"कोई बात नहीं..."

"तुम्हें तो शायद पता भी नहीं कि तुम किस आग के इतने करीब खड़ी हो।"

उसकी आँखों में अब एक अजीब-सी चमक थी।

जलन...

ज़िद...

और जीतने का जुनून।

उसने अपनी ड्रेस ठीक की, चेहरे पर फिर से वही मासूम मुस्कान सजाई और पूरे Royal Attitude के साथ उनकी तरफ़ कदम बढ़ा दिए।

उसकी High Heels की Tap... Tap... Tap... की आवाज़ पूरे लॉबी में गूँजने लगी।

हर कदम के साथ उसके चेहरे की मुस्कान गहरी होती जा रही थी...

और जो उसे अच्छी तरह जानते थे...

वे समझ जाते कि—

तारा जब इस तरह मुस्कुराती है... तब किसी न किसी की मुसीबत तय होती है।

Tap... Tap... Tap...

तारा की हाई हील्स की आवाज़ पूरे Reception Lobby में गूँज रही थी।

उसके चेहरे पर वही मीठी-सी मुस्कान थी...

लेकिन उसकी आँखों में उतर चुकी ठंडक किसी तूफ़ान का इशारा दे रही थी।

उधर वह लड़का अब भी उस लड़की से हँसते हुए बात कर रहा था।

उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि कोई उसे लगातार देख रहा है।

तारा धीरे-धीरे उनके बिल्कुल पीछे जाकर रुक गई।

उसने एक नज़र उस लड़की पर डाली...

फिर उस लड़के पर।

उसके होंठों की मुस्कान और गहरी हो गई।

"Excuse me..."

उसकी मधुर आवाज़ सुनते ही दोनों ने एक साथ पीछे मुड़कर देखा।

जैसे ही उस लड़के की नज़र तारा पर पड़ी...

उसके चेहरे की मुस्कान एक पल के लिए थम गई।

"त... तारा?"

उसकी आवाज़ में साफ़ हैरानी थी।

तारा ने बेहद मासूमियत से मुस्कुराते हुए कहा,

"हाँ... मैं।"

"लगता है... मैंने Wrong Time पर डिस्टर्ब कर दिया।"

उसकी बात सुनकर वह लड़का तुरंत बोला,

"न-नहीं... ऐसी कोई बात नहीं है।"

लेकिन तारा की नज़रें अब उस लड़की पर टिक चुकी थीं।

वह मुस्कुराई...

इतनी प्यारी मुस्कान कि कोई भी उसे देखकर धोखा खा जाए।

"Hi..."

"मैं तारा शेखावत हूँ।"

लड़की ने भी मुस्कुराकर हाथ बढ़ाया।

"Hello Ma'am, I'm—"

लेकिन वो अपना नाम पूरा भी नहीं बता पाई थी कि तारा ने उसका हाथ थाम लिया।

और उसके उंगली में पड़ा हुआ उसका अंगूठी जिसमें हल्के हल्के कांटे लगे हुए थे वो उस लड़की के हाथों में चुभन लगे जिससे उस लड़की के हाथों से हल्का-हल्का खून गिरने लगा ।

उसकी पकड़ न ज़्यादा कड़ी थी...

न ज़्यादा ढीली...

मगर इतनी मज़बूत ज़रूर थी कि लड़की हाथों में उन कांटों के वजह से बहुत दर्द हो रहा था।

तारा ने उसकी आँखों में देखते हुए मुस्कुराकर कहा,

"तुम्हारी Smile बहुत प्यारी है..."

"...और मेरे लोगों से इतनी खुलकर बात करने की आदत भी।"

आख़िरी शब्द उसने इतनी धीमी आवाज़ में कहे कि सिर्फ़ वही लड़की सुन सकी।

लड़की का चेहरा पल भर में फीका पड़ गया।

उसे समझ नहीं आया कि यह तारीफ़ थी...

या छिपी हुई चेतावनी।

वहीं वह लड़का दोनों के बीच का बदलता माहौल महसूस करके उलझन में पड़ गया।

उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था...

कि अभी-अभी लॉबी का तापमान अचानक इतना ठंडा कैसे हो गया।

उस लड़की को बहुत ही ज्यादा दर्द हो रहा था पर वो चिल्ला भी नहीं पा रही थी । आखिर उसके सामने तारा शेखावत जो खड़ी थी और उसके आंखों में एक वार्निंग थी कि अगर वो चिल्लाई तो शायद वह जिंदा ना बचे ।

जिस शख़्स के सामने तारा खड़ी थी...

वो कोई आम इंसान नहीं था।

वो था—ध्रुव ओबेरॉय।

Chairman & CEO of Oberoi Enterprises.

भारत का सबसे बड़ा Diamond Merchant...

और पूरी दुनिया में Second Largest Diamond Merchant के रूप में उसकी पहचान थी।

कहा जाता था कि अगर दुनिया के सबसे दुर्लभ और बेशकीमती हीरों की बात हो...

तो उनमें से आधे से ज़्यादा किसी न किसी तरह ध्रुव ओबेरॉय के साम्राज्य से होकर गुज़रे होते थे।

बिज़नेस की दुनिया में उसका नाम ही एक Brand था।

लोग उसकी दौलत से ज़्यादा उसकी बुद्धिमानी और बिज़नेस माइंड से डरते थे।

सिर्फ़ 24 साल की उम्र में उसने Oberoi Enterprises को उस मुकाम पर पहुँचा दिया था...

जहाँ पहुँचना बड़े-बड़े बिज़नेसमैन का सपना होता है।

पूरे कॉर्पोरेट वर्ल्ड में उसकी एक ही पहचान थी—

"The Diamond King."

उसकी एक Signature पर करोड़ों नहीं...

अरबों की डील फ़ाइनल हो जाती थी।

विदेशी कंपनियाँ उसके साथ पार्टनरशिप करने के लिए महीनों इंतज़ार करती थीं।

लेकिन...

इतना बड़ा नाम होने के बावजूद उसके चेहरे पर कभी घमंड नहीं दिखता था।

वो अपने एम्पलाई से सम्मान से बात करता था...

और शायद यही वजह थी कि इस समय भी वह सामने खड़ी एक जूनियर एम्पलाई से मुस्कुराकर बात कर रहा था।

उसे ज़रा भी एहसास नहीं था...

कि कुछ ही कदम दूर खड़ी एक लड़की उसकी हर मुस्कान...

और हर नज़र का हिसाब अपने दिल में लिख रही थी।

ध्रुव ओबेरॉय...

नाम ही काफ़ी था लोगों की धड़कनें बढ़ाने के लिए।

लगभग 6'3" लंबा, मज़बूत और एथलेटिक शरीर, चौड़े कंधे और ऐसी शख़्सियत कि जहाँ से गुज़र जाए, लोग अनायास ही उसे देखने लगें।

उसके घने, हल्के वेवी ब्लैक बाल हमेशा करीने से सेट रहते थे।

तीखे नैन-नक्श, शार्प जॉलाइन और हल्की-सी ट्रिम्ड दाढ़ी उसके व्यक्तित्व को और भी प्रभावशाली बना देती थी।

लेकिन...

उसकी सबसे ख़ास पहचान थीं उसकी आँखें।

गहरी Hazel Brown Eyes...

जिनमें एक अजीब-सी गर्मजोशी भी थी और ज़रूरत पड़ने पर बर्फ़ जैसी सख़्ती भी।

जो उसे पहली बार देखता, उसे उसकी आँखों में एक सुकून नज़र आता...

लेकिन बिज़नेस मीटिंग में वही आँखें सामने वाले की हर चाल पढ़ लेती थीं।

उसके चेहरे पर अक्सर एक हल्की, आत्मविश्वास से भरी मुस्कान रहती थी।

वह ज़ोर-ज़ोर से हँसने वालों में से नहीं था...

लेकिन जब भी मुस्कुराता, उसके गालों में पड़ने वाला हल्का-सा Dimple उसकी पर्सनैलिटी को और भी आकर्षक बना देता था।

वह हमेशा Three-Piece Suit या फिर Premium Tailored Formal Wear में नज़र आता था।

उसकी कलाई पर एक महँगी Luxury Watch, हाथ में प्लैटिनम की साधारण-सी रिंग और हल्की-सी Woody Perfume की खुशबू...

उसकी रॉयल लाइफ़स्टाइल का एहसास करा देती थी।

ध्रुव का स्वभाव उसकी दौलत से बिल्कुल अलग था।

वह शांत, विनम्र और बेहद Gentleman था।

उसे अपने कर्मचारियों पर कभी बेवजह गुस्सा करते किसी ने नहीं देखा।

वह मानता था कि सम्मान कमाया जाता है, डर से नहीं।

लेकिन...

जो कोई उसके विश्वास को तोड़ देता...

या उसके परिवार और उसके उसूलों के ख़िलाफ़ जाता...

उसके लिए ध्रुव का दूसरा रूप किसी तूफ़ान से कम नहीं होता था।

कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लोग अक्सर कहते थे—

"अगर अर्णव की ख़ामोशी मौत का एहसास कराती है... तो ध्रुव की मुस्कान सामने वाले को अपनी गलती का एहसास करा देती है।"

उसकी मौजूदगी में लोग खुद-ब-खुद अपनी आवाज़ धीमी कर लेते थे।

क्योंकि ध्रुव ओबेरॉय कभी अपनी ताक़त दिखाता नहीं था...

उसे उसकी शख़्सियत ही महसूस करा देती थी।

और इसी की वजह से तारा उसकी दीवानी हो गई थी और यह दीवानगी आज की नहीं थी बल्कि कॉलेज टाइम की थी कॉलेज में ध्रुव तारा का सीनियर था । और कॉलेज में भी जब भी कोई लड़की ध्रुव के करीब जाती तो तारा उसके साथ क्या करती यह किसी को पता ही नहीं चलता था ।

और यह बातें ध्रुव को अच्छे से पता थी की धारा उसको पसंद करती है पर वह अर्णव का अच्छा दोस्त था । और कुछ इल्लीगल काम जो ऑस्ट्रेलिया या फिर और देश में होते थे वह अर्णव के साथ मिलकर करता था ।

कहीं ना कहीं वह भी तारा को पसंद करता था इसीलिए वो कभी भी किसी और लड़की के तरफ उस नजरिए से नहीं देखा था ।

पर इस बात का एहसास उसने कभी तारा को होने नहीं दिया वो हमेशा तारा से फॉर्मल होकर ही बात करता था ।

पर तारा को ये नहीं पता था कि जब ध्रुव की दीवानगी शुरू होगी तो उसके दीवानगी बहुत छोटी पड़ जाएगी ।

  Chapter  pasand aare re ho to like or follow kar lijiye ga or 5 star rating bhi dijiye ga ...

Sorry guys,  mene kaha tha ki aaj 1 twist dugi per mai nahi likh pari aaj ...

Kaal paka dugi promise...

Kyu ki Iss part ko bhi likhna jaruri tha to ye likh di aab kal dhamaka hoga .....

thanku 💛 😊

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Radha Radha 🙏🙏🙏🙏🙏

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